Saturday, January 8, 2011

ऊर्जा संयंत्र वाले राज्य होंगे रोशन

अब उन राज्यों को ज्यादा फायदा होगा जहां केंद्र सरकार की ताप बिजली परियोजनाएं लग रही हैं। आगामी 12वीं व 13वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान देश के जिस राज्य में इस श्रेणी की परियोजनाएं लगेंगी उस राज्य को उस परियोजना की 50 फीसदी बिजली मिला करेगी। शेष में से 35 फीसदी बिजली अन्य राज्यों को और 15 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार के खाते में जाएगा। इस बारे में एक प्रस्ताव को गुरुवार को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। इस फैसले की वजह से गदरवारा, तालचेर, कुडगी, दरलिपल्ली, बरेठी, कटवा, धुवरन, खारगोन, कठुवा, बिलहौर सहित कई अन्य बिजली परियोजनाओं पर असर पड़ेगा। ये परियोजनाएं आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में लग रही हैं। जाहिर है कि आने वाले वर्षो में इन राज्यों को ज्यादा बिजली मिला करेगी। कैबिनेट ने यह भी फैसला किया कि मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड में एनटीपीसी की बरेठी परियोजना से 35 फीसदी बिजली पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश को दी जाएगी, ताकि उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड में बिजली पहुंचाई जा सके। इस परियोजना की 15 फीसदी बिजली के लिए अभी कोई फैसला नहीं किया गया है। सरकार ने उम्मीद जताई है कि नए नियम की वजह से राज्य ज्यादा से ज्यादा केंद्रीय बिजली परियोजनाएं लगाना चाहेंगे ताकि उनका बड़ा हिस्सा उन्हें मिल सके। खास तौर पर जिन राज्यों में बिजली की सबसे ज्यादा कमी है वे नई केंद्रीय परियोजनाओं को हरसंभव मदद मुहैया कराएंगे। कैबिनेट ने आंध्र प्रदेश और उड़ीसा में राष्ट्रीय जोखिम चक्रवात निपटान परियोजना (एनसीआरएमपी) लागू करने के लिए 1496.71 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को भी हरी झंडी दिखा दी है। इससे आंध्र प्रदेश के 5.6 लाख और उड़ीसा के 5.5 लाख नागरिकों को फायदा पहुंचेगा। इन क्षेत्रों को चक्रवात से बचाने के लिए कई स्तर पर कदम उठाए जाएंगे।

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