Thursday, April 7, 2011

ऊर्जा का अपव्यय रोकना जरूरी


चेर्नोबिल और फुकुशिमा के परमाणु संयंत्र में हुए विस्फोट के बाद हुई तबाही के बाद यह प्रश्न स्वाभाविक रूप से सबके सामने है कि आखिर बिजली और पेट्रोल से चलने वाले संयंत्रों की क्या वाकई इतनी जरूरत है। देखा जाए तो अपनी काहिली के कारण ही हम विनाश को न्योता दे रहे हैं। ऐसे एक नहीं अनेक काम हैं जो हम अपनी शारीरिक ऊर्जा से कर सकते हैं, लेकिन इसे अनदेखा करते हुए अन्य संसाधनों का उपयोग करते हैं। यदि हम ऊर्जा का सही उपयोग करें तो पानी में तैरने वाले बम यानी ऊर्जा संयंत्रों की शायद आवश्यकता ही न पड़े। जो काम हम सहज रूप से कर सकते हैं, उसके लिए हम बिजली, पेट्रोल या फिर डीजल से चलने वाले यंत्रों का इस्तेमाल कर विनाश को आमंत्रित कर रहे हैं। ऊर्जा के साधन के रूप में मानव जाति परंपरागत रूप से कोयला, गैस, तेल, जल आदि के बिना ऊर्जा संग्रहित करती आई है। प्राचीन भारत ही नहीं दुनिया के अनेक देशों में ऊर्जा प्राप्त करने के लिए पशुओं का बहुतायत से इस्तेमाल किया जाता था। पशुओं से प्राप्त ऊर्जा खत्म नहीं होती थी, जिसके बदले पशुओं को केवल चारा ही दिया जाता था। इस ऊर्जा को आयात भी नहीं करना पड़ता था। इसके लिए विदेशी कंपनियों पर भी निर्भर नहीं रहना पड़ता था। फलस्वरूप में पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य को किसी प्रकार का खतरा नहीं था। इतना ही नहीं यह ऊर्जा काफी सस्ती भी है। यदि सरकार ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को विकसित करना चाहती है तो उसे पशुओं को अनदेखा नहीं करना चाहिए, क्योंकि पशुबल के उपयोग से हम ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकते हैं। ऊर्जा हमारी रोज की आवश्यकता है। जीवन को सुचारू रूप से चलाने के लिए और देश का उत्पादन बढ़ाने के लिए हमें ऊर्जा की आवश्यकता होती है। ऊर्जा के बिना न तो व्यक्ति और न ही देश का विकास हो पाएगा। हमारे सामने ऊर्जा के उत्पादन के अनेक विकल्प हैं। इसमें से हमें ऐसे विकल्पों पर विचार करना चाहिए जो सस्ते, सुरक्षित और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाने वाले हों। इसके अलावा यह कभी खत्म न हो इसका भी ध्यान रखा जाना आवश्यक है। यदि ऊर्जा का उत्पादन हमारे ही घर-आंगन में हो तो इससे बढि़या बात और क्या होगी? आज ऊर्जा प्राप्त करने के लिए थर्मल पावर, तेल, गैस, कोयला, पवन ऊर्जा आदि संसाधनों का उपयोगा किया जाता है। यदि इन ऊर्जा विकल्पों पर ध्यान दिया जाए तो हमें पशुबल से प्राप्त ऊर्जा सबसे सस्ती और श्रेष्ठ साबित होगी। आज हमें अपनी कुल आवश्यकता का 30 प्रतिशत ऊर्जा पशुओं से ही प्राप्त होती है। यह बढ़ाकर 80 प्रतिशत किया जा सकता है। यहां हमें ऊर्जा का उत्पादन बढ़ाने से पहले इसके अपव्यय को रोकने पर भी विचार करना चाहिए। देखा जाए तो मानव शरीर भी एक पॉवर प्लांट है। हम जो कुछ भी खाते हैं वह इस पॉवर प्लांट का ईधन है। इस खुराक से हमारे शरीर में शर्करा पैदा होती है जो ऊर्जा का ही एक स्रोत है। यह ऊर्जा हमारे हाथ-पैर के उपयोग से प्राप्त की जा सकती है। हमारे रोजमर्रा के जीवन में ऐसे कई कार्य हैं, जो हम शरीर के स्नायु ऊर्जा से होते हैं। इन कार्यो के लिए पेट्रोल, गैस, बिजली या पशु का उपयोग किया जाए तो यह एक प्रकार का राष्ट्रीय व्यय है। पहले ऊर्जा के इस राष्ट्रीय व्यय पर रोक लगाई जानी चाहिए। मान लो हमें एक किमी की दूरी तय करनी है, इसके लिए हमारे पास कई विकल्प हैं। पहला विकल्प तो हमारा शरीर ही है। हमारा शरीर भी एक वाहन है। हमारे दो पाँव उसके चक्के हैं। यदि हम एक किमी चलकर जाते हैं तो हमारे शरीर की जो ऊर्जा खपत होती है तो इसके लिए हमें किसी का सहारा नहीं लेना पड़ता। इसके बजाय यदि हम वही दूरी घोड़े पर बैठकर करते हैं तो इसके लिए हमें घोड़ा पालना होगा। उसके लिए घास-चारे की व्यवस्था करनी होगी। इसलिए घोड़े की ऊर्जा से अधिक सस्ती हमारे शरीर की ऊर्जा हुई। अब हम यदि एक किमी चलने के लिए पेट्रोल या डीजल से चलने वाले वाहन का उपयोग करते हैं तो कई समस्याएं पैदा हो जाती हैं। इन वाहनों का उत्पादन करने के लिए हमें फैक्टरियां बनानी होंगी। इसके लिए वृक्षों को काटना होगा। फैक्टरी से प्रदूषण होता है इस कारण हवा और पानी विषाक्त होता है और श्रमिकों का स्वास्थ्य बिगड़ता है। इसके अलावा वाहनों को चलाने के लिए हमें कच्चे तेल का आयात करना पड़ता है। इसके लिए हमें अनाज और सब्जी का निर्यात करना पड़ता है। कच्चे तेल को शुद्ध करने के लिए रिफाइनरियों की स्थापना करनी पड़ती है। यदि एक किमी चलने के लिए हम घोड़ा या बैल का उपयोग करें तो इसके लिए हमें न तो फैक्टरियां डालने की आवश्यकता पड़ेगी और न ही किसी प्रकार के निवेश की आवश्यकता होगी। इतना ही नहीं पशुओं से हमें गाोबर भी प्राप्त होता है जो ऊर्जा का एक सशक्त माध्यम है। इससे रसोई गैस ही नहीं, बल्कि बिजली भी बनाई जा सकती है। इन पशुओं के बजाय यदि हम साइकिल का इस्तेमाल करें तो हमारी गति बढ़ सकती है और पशुओं को पालने के खर्च से बच सकते हैं। आज हम आधुनिकता के चंगुल में जकड़ चुके हैं। हमारे शरीर के पॉवर प्लांट में पैदा होने वाली ऊर्जा का उपयोग हम घटाते जा रहे हैं और वाह्य ऊर्जा पर निर्भर होते जा रहे हैं। एक छोटा सा उदाहरण हमारे सामने है। पहले हम चटनी पीसने के लिए सिल-बट्टे का इस्तेमाल करते थे, आज उसके लिए हम मिक्सी का इस्तेमाल करते हैं। इस चटनी में वह स्वाद ही नहीं, जो सिल-बट्टे की चटनी में होता है। सिल-बट्टे में हमारी शारीरिक ऊर्जा की खपत होती थी। इसके बजाय मिक्सी के लिए बिजली की आवश्यकता होती है। ऐसे कई क्रियाकलाप थे, जिसमें हमारी शारीरिक ऊर्जा लगती थी, लेकिन अब अन्य संसाधनों का इस्तेमाल होता है। बिजली पैदा करने के लिए पॉवर प्लांट की स्थापना की जाती है। इसे चलाने के लिए नदी का प्रवाह रोककर विशाल बांध तैयार किए जाते हैं। बांधों के निर्माण के लिए जंगलों को काटना पड़ता है। यही नहीं वनवासियों को बेघर करना पड़ता है। थर्मल पॉवर प्लांट की स्थापना करने के लिए कोयले की खदानें खोदनी पड़ती हैं। इससे हवा में प्रदूषण फैलता है। परमाणु संयंत्र की स्थापना के लिए खेती की जमीनें बरबाद की जाती हैं। इससे किसान बेरोजगार होने लगते हैं। इन परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में यदि कभी धमाका होता है तो विकिरण से मौत का खौफ बना रहता है। मिक्सर तो हमारी लाइफ स्टाइल का एक उदाहरण मात्र है। हम शारीरिक ऊर्जा से कई ऐसे काम कर ही सकते हैं, जिसके लिए हमें अन्य संसाधनों का मुंह ताकना पड़ता है। जिम में खर्च की जाने वाली ऊर्जा का इस्तेमाल यदि अन्य कामों में किया जाए तो शरीर भी स्वस्थ रहेगा और ऊर्जा आत्मनिर्भरता भी हासिल हो जाएगी। कपड़े धोने के लिए वाशिंग मशीन, सफाई करने के लिए वैक्यूम क्लीनर आदि यंत्र आज हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन गए हैं। पहले ये सब नहीं थे तब भी यह काम होते थे। पहले लोग पैदल चलकर अपने शरीर को स्वस्थ रखते थे आज शरीर में चर्बी जमा करते हैं और दवा खाते हैं। (लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं)

2 comments:

  1. शत-प्रतिशत सत्य कहा है आपने. मनुष्य अकर्मण्य होता जा रहा है. पहले जमके ठून्सेगा फिर दवा खायेगा.
    अरे मानव ! उठो, जागो और अपना कार्य स्वयं करो, यह तुम्हारे अस्तित्व का प्रश्न है.

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  2. आपका लेख पढ़कर हम और अन्य ब्लॉगर्स बार-बार तारीफ़ करना चाहेंगे पर ये वर्ड वेरिफिकेशन (Word Verification) बीच में दीवार बन जाता है.
    आप यदि इसे कृपा करके हटा दें, तो हमारे लिए आपकी तारीफ़ करना आसान हो जायेगा.
    इसके लिए आप अपने ब्लॉग के डैशबोर्ड (dashboard) में जाएँ, फ़िर settings, फ़िर comments, फ़िर { Show word verification for comments? } नीचे से तीसरा प्रश्न है ,
    उसमें 'yes' पर tick है, उसे आप 'no' कर दें और नीचे का लाल बटन 'save settings' क्लिक कर दें. बस काम हो गया.
    आप भी न, एकदम्मे स्मार्ट हो.
    और भी खेल-तमाशे सीखें सिर्फ़ "अवध टाइम्स" (Avadh Times) पर.
    यदि फ़िर भी कोई समस्या हो तो यह लेख देखें -


    वर्ड वेरिफिकेशन क्या है और कैसे हटायें ?

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